Rajasthan

Khairthal Satellite Hospital News | खैरथल अस्पताल में सुविधाओं का अभाव

Last Updated:May 14, 2026, 10:30 IST

Alwar News: खैरथल जिला मुख्यालय का सेटेलाइट अस्पताल बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है. 2022 में दर्जा मिलने के बावजूद यहाँ ऑपरेशन थिएटर बंद पड़ा है और सोनोग्राफी की कोई सुविधा नहीं है. मरीजों को निजी लैब में 1200 रुपये तक देकर जांच करानी पड़ रही है. स्टाफ की कमी और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. गायनी विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद भी ओटी बंद होने से गर्भवती महिलाओं को रेफर करना पड़ रहा है. स्थानीय लोग अब जल्द से जल्द सुविधाओं को सुचारू करने की मांग कर रहे हैं.

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Alwar News: राजस्थान के खैरथल जिला मुख्यालय स्थित राजकीय सेटेलाइट अस्पताल प्रशासन और सरकार की अनदेखी का शिकार बना हुआ है. साल 2022 में इस अस्पताल को ‘सेटेलाइट हॉस्पिटल’ का दर्जा दिया गया था ताकि स्थानीय लोगों को जिला स्तर की आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें. लेकिन विडंबना यह है कि करीब 4 साल बीत जाने के बाद भी यहाँ के हालात जस के तस बने हुए हैं. खैरथल सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हजारों मरीजों को आज भी बेहतर इलाज के लिए अलवर या अन्य बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.

अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) जांच की सुविधा न होना है. अस्पताल में न तो मशीन उपलब्ध है और न ही कोई विशेषज्ञ चिकित्सक (सोनोलॉजिस्ट) तैनात है. इसका सीधा फायदा निजी लैब संचालक उठा रहे हैं. सरकारी अस्पताल पहुँचने वाले गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों पर 800 से 1200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं. अस्पताल पहुंचे मरीज मनोज, रामकुमार और फूलवती ने बताया कि पेट दर्द की जांच के लिए डॉक्टर ने सोनोग्राफी लिखी, लेकिन सुविधा न होने के कारण उन्हें महंगे दामों पर बाहर से जांच करानी पड़ी.

ताले में बंद ऑपरेशन थिएटर और रेफर का दर्दअस्पताल का ऑपरेशन थिएटर (OT) वर्षों से धूल फांक रहा है. हैरानी की बात यह है कि ओटी में आवश्यक उपकरण तो मौजूद हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण इस पर ताला लटका है. हाल ही में गायनी विशेषज्ञ डॉ. मीनल जाजोरिया की नियुक्ति तो हुई है, लेकिन ओटी चालू न होने से सिजेरियन डिलीवरी (बड़े ऑपरेशन) संभव नहीं हो पा रही हैं. डॉ. मीनल ने बताया कि 1 से 11 मई के बीच 22 डिलीवरी केस आए, लेकिन सिजेरियन मामलों को अभी भी रेफर करना पड़ रहा है. यदि ओटी शुरू हो जाए तो प्रसूताओं को स्थानीय स्तर पर ही सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिल सकेगी.

पदों का अकाल और राजनीतिक हस्तक्षेपअस्पताल की बदहाली का एक बड़ा कारण चिकित्सकों के पदों का रिक्त होना है. जानकारी के अनुसार, जो चिकित्सक यहाँ तैनात हैं, उनमें से कई को राजनीतिक दबाव के चलते अन्य स्थानों पर लगाया गया है. अस्पताल के पीएमओ डॉ. नितिन शर्मा ने स्वीकार किया कि सोनोग्राफी और अन्य सुविधाओं के अभाव के बारे में उच्चाधिकारियों को कई बार लिखित में अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है. सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री तक गुहार लगाने के बावजूद खैरथल की जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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