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भरतपुर के किसानों का ‘गोल्डन’ फॉर्मूला! कम मेहनत में मिल रहा डबल मुनाफा

Last Updated:April 29, 2026, 05:10 IST

Bharatpur Marigold Flower Farming Success Story: भरतपुर के सिकंदरा गांव के किसान पीले और सफेद गेंदे की खेती कर अपनी तकदीर बदल रहे हैं. सीजन और त्योहारों की मांग के अनुसार खेती करने से उन्हें बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं. पारंपरिक फसलों के मुकाबले गेंदे की खेती में लागत कम और मुनाफा ज्यादा है. किसानों की इस सफलता को देख अब आसपास के अन्य ग्रामीण भी फूलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. यह मॉडल न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि क्षेत्र में कृषि नवाचार की नई मिसाल भी पेश कर रहा है.

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Bharatpur Marigold Flower Farming Success Story: राजस्थान के भरतपुर जिले का सिकंदरा गांव इन दिनों कृषि क्षेत्र में एक नए और सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है. यहाँ के किसानों ने गेहूं और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलकर फूलों की खेती को अपनाया है. किसानों की यह नई सोच न केवल उनकी पहचान बदल रही है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती दे रही है. वर्तमान में यहाँ के किसान बड़े पैमाने पर पीले और सफेद गेंदे की खेती कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर उनकी आय में बढ़ोतरी का जरिया बनी है.

सिकंदरा के किसानों की सफलता का सबसे बड़ा राज ‘मार्केट प्लानिंग’ है. किसान अपनी फसल की बुवाई और कटाई का समय पूरी तरह सीजन के हिसाब से तय करते हैं. विशेष रूप से त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन को ध्यान में रखकर गेंदे की फसल तैयार की जाती है. जब बाजार में फूलों की मांग चरम पर होती है, ठीक उसी समय फसल की सप्लाई शुरू कर दी जाती है. इस रणनीति की वजह से किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे बाजार में अपनी फसल के बेहतर दाम मिल पा रहे हैं.

पीला और सफेद गेंदा: दोनों की भारी मांगकिसानों ने अपनी क्यारियों में पीले और सफेद दोनों ही किस्मों के गेंदे लगाए हैं. पीले गेंदे का उपयोग मुख्य रूप से धार्मिक आयोजनों, मंदिरों और घरों की सजावट में होता है. वहीं, सफेद गेंदे की मांग अब आधुनिक शादियों और बुके (Bouquet) बनाने में तेजी से बढ़ी है. किसानों का कहना है कि अगर सही योजना और तकनीक के साथ गेंदे की खेती की जाए, तो यह अन्य फसलों की तुलना में कई गुना अधिक फायदे का सौदा साबित होती है.

कम लागत में अधिक उत्पादनगेंदे की खेती की एक और प्रमुख विशेषता इसकी कम लागत और आसान देखभाल है. अन्य नकदी फसलों के मुकाबले इसमें बीमारियां कम लगती हैं और यह कम पानी में भी अच्छा उत्पादन दे देती है. कम मेहनत में बेहतर मुनाफा मिलने के कारण क्षेत्र के अन्य गांवों के किसान भी अब सिकंदरा के इस ‘फ्लोरीकल्चर मॉडल’ की ओर आकर्षित हो रहे हैं. यहाँ के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि यदि संसाधनों का सही प्रबंधन और बाजार की समझ हो, तो खेती को एक सफल बिजनेस में बदला जा सकता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Location :

Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

April 29, 2026, 05:10 IST

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