Panch Kalyanaka Mahotsav | पंच कल्याण महोत्सव जैन धर्म

Last Updated:April 29, 2026, 06:48 IST
Panch Kalyanaka Mahotsav Jainism Bidding Tradition: जैन धर्म के पंच कल्याण महोत्सव में भगवान के पांच कल्याणकों का भव्य मंचन होता है. इस महोत्सव की सबसे खास परंपरा भगवान के माता-पिता बनने के लिए लगने वाली बोलियां हैं जो कई बार करोड़ों तक पहुँचती हैं. पंडित धर्मेंद्र शास्त्री के अनुसार माता त्रिशला और राजा सिद्धार्थ बनने वाले श्रद्धालुओं को कड़े संयम और पवित्रता का पालन करना पड़ता है. बोलियों से प्राप्त राशि का उपयोग महोत्सव के आयोजन और धर्म कार्यों में किया जाता है. यह आयोजन जैन समाज की गहरी आस्था और सामूहिक दानशीलता का अद्भुत संगम पेश करता है.
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Panch Kalyanaka Mahotsav Jainism Bidding Tradition: जैन धर्म में पंच कल्याण महोत्सव का आयोजन अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है. यह महोत्सव मुख्य रूप से किसी नए जैन मंदिर की प्रतिष्ठा या मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर आयोजित किया जाता है. इस उत्सव में तीर्थंकर भगवान के जीवन के पांच प्रमुख चरणों—गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष—का विस्तार से मंचन और अनुष्ठान किया जाता है. इस आयोजन की सबसे विशिष्ट और चर्चित परंपरा ‘बोलियों’ की है. भगवान के माता-पिता की भूमिका निभाने के लिए श्रद्धालुओं के बीच जबरदस्त उत्साह रहता है और यह बोली लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक पहुँच जाती है.
पंडित धर्मेंद्र शास्त्री के अनुसार, भगवान के माता-पिता माता त्रिशला और राजा सिद्धार्थ की भूमिका निभाना केवल सौभाग्य की बात नहीं, बल्कि एक बड़ी आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी है. जो श्रद्धालु इस भूमिका के लिए चुने जाते हैं, उन्हें पूरे आयोजन के दौरान अत्यंत कठिन नियमों और संयम का पालन करना पड़ता है. उनके खान-पान की शुद्धता, सात्विक रहन-सहन और आचरण में पूरी पवित्रता अनिवार्य होती है. वे महज कलाकार नहीं, बल्कि पूरी श्रद्धा के साथ उन महान व्यक्तित्वों को आत्मसात करते हैं.
दान और धर्म का सामूहिक स्वरूपतीन दिवसीय इस महोत्सव में जन्म कल्याणक का दृश्य सबसे अधिक भव्य और आकर्षक होता है. इस दौरान इंद्र द्वारा भगवान के जन्म का उत्सव मनाने की परंपरा को जीवंत किया जाता है. महोत्सव के भव्य आयोजन, सजावट और अनुष्ठानों के लिए जो बड़ी धनराशि आवश्यक होती है, वह इन बोलियों के माध्यम से ही एकत्रित की जाती है. समाज के लोग इसे अपनी प्रतिष्ठा से ज्यादा धर्म कार्य में अपना योगदान और समर्पण मानते हैं. हर पात्र अपनी भूमिका को पूरी निष्ठा के साथ निभाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है.
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्वपंच कल्याण महोत्सव न केवल जैन समाज की आस्था को दर्शाता है, बल्कि यह उनकी सामूहिक एकता और भागीदारी का भी प्रतीक है. यहाँ लोग न केवल भगवान के जीवन दर्शन को करीब से समझते हैं, बल्कि दान के माध्यम से उस पवित्र कथा का अभिन्न अंग बनने का गौरव प्राप्त करते हैं. यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Udaipur,Udaipur,Rajasthan
First Published :
April 29, 2026, 06:48 IST



