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रेखा की वो फिल्म, जिसमें थी मोहम्मद रफी-आशा भोसले की सुपरहिट कव्वाली, खूब तड़पाए जवां दिल

Last Updated:April 29, 2026, 22:09 IST

Mohammed Rafi superhit Qawwali Songs: मोहम्मद रफी क्लासिकल सिंगर थे. हर तरह के गानों में अपनी आवाज का जादू बिखेर देते थे. रफी साहब कव्वाली को जिस अंदाज में गाते थे, वो अंदाज दिल को छू जाता था. उन्होंने कई फिल्मों में कव्वालियां गाईं. 70 के दशक में तीन ऐसी फिल्में आईं जिनमें कव्वाली थी. मोहम्मद रफी ने अपनी रूहानी में इन कव्वालियों को कालजयी बना दिया. दिलचस्प बात यह है कि तीनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर भी हिट रहीं. तीनों कव्वाली इतनी पॉप्युलर हुईं कि फिल्मों की पहचान इन कव्वालियों से है. वो तीन सुपरहिट कव्वाली कौन सी थीं, आइये जानते हैं………

मोहम्मद रफी को कव्वाली में अपनी आवाज का ऐसा जादू बिखेरते थे कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे. 70 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में कव्वाली गाईं. इन कव्वालियों की पॉप्युलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 50 साल बाद भी इनका क्रेज कम नहीं हुआ. मोहम्मद रफी ने 70 के दशक में तीन कालजयी कव्वाली गाईं. ये कव्वालियां थीं : ‘जीना तो है उसी का’, ‘ राज की बात कह दूं तो’ और ‘पर्दा है पर्दा.’ मजे की बात यह है कि तीनों फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं.

सबसे पहले बात करते हैं 28 अप्रैल 1971 को रिलीज फिल्म ‘अधिकार’ की. इसमें मोहम्मद रफी ने शानदार कव्वाली ‘जीना तो है उसी का’ गाई थी. इस फिल्म इसका निर्देशन एसएम सागर ने किया था. फिल्म की स्टोरी सलीम-जावेद ए ही लिखी थी लेकिन क्रेडिट नहीं दिया गया था. फिल्म में अशोक कुमार, नंदा, देब मुखर्जी लीड रोल में थे. ‘अधिकार’ फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. गीतकार रमेश पंत थे. फिल्म की एक कव्वाली ‘जीना तो है उसी का जिसने यह राज जाना, है काम आदमी का, औरों के काम आना’ को मोहम्मद रफी ने अपनी मखमली आवाज में गाया था.

यह कव्वाली कालजयी साबित हुई. कव्वाली बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता प्राण पर फिल्माई गई थी. फिल्म का निर्देशक एसएम सागर दादा मुनि के नाम से विख्यात बॉलीवुड अभिनेता अशोक कुमार के सीक्रेटरी थे. अधिकार फिल्म में कुल 6 गाने थे. ‘कोई माने या ना माने, जो कल तक थे अनजाने, वो आज हमें जान से भी प्यारे हो गए’ गाना किशोर कुमार-आशा भोसले ड्यूएट था.

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1973 का साल हिंदी सिनेमा के लिए बेहद खास है. इसी साल बॉलीवुड को ‘जंजीर’ फिल्म से एंग्रीमैन अमिताभ बच्चन मिले तो इसी साल धर्मेंद्र की 8 फिल्में हिट रहीं. इसी साल रेखा ने चार-पांच फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. हेमा मालिनी-जया भादुड़ी की फिल्मों ने शानदार प्रदर्शन किया. यह संयोग कितना दिलचस्प है कि इस साल रिलीज हुई चार फिल्मों की कव्वाली कालजयी साबित हुईं. ये फिल्में थीं : जंजीर, धर्मा, हंसते जख्म और अनोखी अदा. यह भी दिलचस्प है कि दो कव्वाली अभिनेता प्राण पर फिल्माई गईं.

‘जंजीर’ फिल्म की कव्वाली ‘यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी’ को भला कौन भुला सकता है. मन्ना डे ने इसे गाया था. इसी साल ‘अनोखी अदा’ फिल्म में किशोर कुमार ने ‘हाल क्या है दिलों का ना पूछो सनम’ कव्वाली गाई थी. यह कालजयी कव्वाली जीतेंद्र पर फिल्माई गई थी. इसी साल ‘हंसते जख्म’ फिल्म में नवीन निश्चल पर एक कव्वाली फिल्माई गई थी. इसके बोल थे : ‘ये माना मेरी जां, मुहब्बत सजा है’. इस कालजयी कव्वाली को रफी साहब ने गाया था.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि 1973 की ही एक फिल्म ‘धर्मा’ की एक कव्वाली इतनी पॉप्युलर हुई कि आज भी निजी जीवन में लोग अपने दिल की बात कहने के लिए इसके बोल का सहारा लेते हैं. हम ‘राज की बात कह दूं तो जाने महफिल में फिर क्या हो’ कव्वाली की बात कर रहे हैं जिसे मोहम्मद रफी-आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी. कव्वाली प्राण साहब-बिंदु पर फिल्माई गई थी.

‘धर्मा’ फिल्म 1973 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में छठवें नंबर पर थी. नवीन निश्चल, रेखा, प्राण, बिंदु, अजीत, मदनपुरी लीड रोल में थे. चांद ने फिल्म का डायरेक्शन किया था. प्रोड्यूसर एसके कपूर थे. धर्मा एक मसाला फिल्म थी. मिलना-बिछुड़ना, धोखा-प्रेम-प्यार सभी एलिमेंट फिल्म में डाले गए थे. प्राण ने मेन रोल निभाया. अजीत पुलिस अफसर बने थे. फिल्म की सफलता में सबसे बड़ा रोल मोहम्मद रफी की कव्वाली ‘राज की बात कह दूं तो’ ने निभाया.

मोहम्मद रफी की एक और कालजयी कव्वाली 27 मई 1977 को रिलीज हुई मनमोहन देसाई की फिल्म ‘अमर अकबर एंथोनी’ में सुनाई दी थी. इस कालजयी कव्वाली के बोल थे : पर्दा ही पर्दा, पर्दे के पीछे पर्दानशीं है, पर्दानशीं को बेपर्दा ना कर दूं तो, तो अकबर मेरा नाम नहीं है. इस कालजयी कव्वाली को गीतकार आनंद बख्शी ने लिखा था. इस कव्वाली ऋषि कपूर को अमर पहचान दी.

फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. यह एक मल्टी-स्टारर फिल्म थी जिसका डायरेक्शन मनमोहन देसाई ने किया था. फिल्म ‘खोया-पाया’ फॉमूला पर ही बेस्ड थी. फिल्म में एक्शन, ट्रेजडी, कॉमेडी, अंधविश्वास सबकुछ देखने को मिला था. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के म्यूजिक से सजी इस गाने का हर गाना सुपरहिट था. करीब 1.2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 15 करोड़ के करीब वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह फिल्म 1977 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर थी.

First Published :

April 29, 2026, 20:59 IST

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