1 मई को आसमान में होने वाला कुछ अजीब, पहले जैसा नहीं दिखेगा चांद, क्या है ‘माइक्रोमून’?

Last Updated:April 28, 2026, 23:20 IST
इस शुक्रवार, यानी 1 मई 2026 की रात आसमान में एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत नजारा दिखने वाला है, जिसे ‘माइक्रोमून’ कहा जा रहा है. इस बार चांद पूर्णिमा के मुकाबले थोड़ा छोटा और इसकी चांदनी भी कुछ फीकी नजर आएगी, क्योंकि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी से अपनी सबसे अधिकतम दूरी यानी ‘अपोजी’ पर होगा.
1 मई को अलग दिखेगा चांद (AI Photo)
इस हफ्ते आसमान में कुछ ऐसा कमाल होने वाला है, जिसे देखने का मौका आपको बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए. इस शुक्रवार, यानी 1 मई 2026 को चांद एकदम अलग नजर आने वाला है, जो आम पूर्णिमा या फुल मून से हटकर होगा. वैज्ञानिकों की मानें तो इस बार हम ‘माइक्रोमून’ के गवाह बनने जा रहे हैं. ये चांद वैसा नहीं दिखेगा जैसा हम रोज देखते हैं; इसकी चांदनी थोड़ी फीकी होगी और आकार देखकर कई लोगों के तो होश ही उड़ जाएंगे.
क्या होता है माइक्रोमून?
अक्सर हम ‘सुपरमून’ के बारे में सुनते हैं जब चांद अपनी पूरी चमक और विशाल आकार के साथ दिखाई देता है, लेकिन माइक्रोमून इसका बिल्कुल उल्टा है. वैज्ञानिक भाषा में समझें तो चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर एक एकदम गोल सर्कल में नहीं, बल्कि एक अंडाकार कोर्स पर करता है. इस यात्रा के दौरान एक समय ऐसा आता है जब चांद पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी पर होता है, जिसे ‘अपोजी’ कहा जाता है. 1 मई को होने वाली पूर्णिमा इसी अपोजी बिंदु पर होगी, जिसके कारण यह ‘माइक्रोमून’ कहलाएगा.
क्यों अलग दिखेगा 1 मई का चांद?
बताया जा रहा है कि जब पूर्णिमा अपोजी के दौरान होती है तो ये औसत पूर्णिमा की तुलना में लगभग 5 से 6 प्रतिशत छोटा और करीब 10 प्रतिशत कम चमकदार दिखाई देता है. यदि हम इसकी तुलना सुपरमून से करें तो यह आसमान में लगभग 14 प्रतिशत छोटा नजर आता है. इसलिए, अगर आप 1 मई को चांद को देखेंगे तो आपको लगेगा कि आज इसकी चांदनी में वो बात नहीं है और यह आकार में भी थोड़ा सिमटा हुआ है.
मई 2026 का अनोखा संयोग
मई का महीना अंतरिक्ष विज्ञान के नजरिए से बेहद दुर्लभ है. इस महीने में एक नहीं बल्कि दो पूर्णिमाएं होने वाली हैं. पहली 1 मई को और दूसरी 31 मई को. खगोल विज्ञान में एक ही महीने में होने वाली दूसरी पूर्णिमा को ‘ब्लू मून’ (Blue Moon) कहा जाता है लेकिन इस बार का संयोग और भी अद्भुत है. मई की ये दोनों ही पूर्णिमाएं ‘माइक्रोमून’ होंगी. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दुर्लभ संयोग सालों में एक बार बनता है जब एक ही महीने के दोनों पूर्णिमा के चांद पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर हों.
भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में इस अद्भुत नजारे को आसानी से देखा जा सकता है. हालांकि, इसकी चमक कम होने के कारण इसे दूरबीन या टेलिस्कोप से देखना ज्यादा रोमांचक होगा. ये ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का एक बेहतरीन मौका है.
About the AuthorUtkarsha Srivastava
Utkarsha Srivastava is seasoned digital journalist specializing in geo-politics issues, currently writing for World section of Hindi. With over a decade of extensive experience in hindi digital media, sh…और पढ़ें
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
April 28, 2026, 23:20 IST



