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कभी 156.7 kmph स्पीड से फेंकी गेंद… कमबैक मैच में विकेट को तरसा गेंदबाज, रफ्तार है पर धार गायब

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कभी 156.7 kmph स्पीड से फेंकी गेंद…कमबैक मैच में विकेट को तरसा गेंदबाज

Last Updated:April 22, 2026, 22:25 IST

Mayank Yadav comeback: 156.7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आईपीएल में सनसनी फैलाने वाले मयंक यादव की वापसी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ इकाना स्टेडियम में मयंक ने 56 रन लुटाकर अपनी गति की धार खोई हुई दिखाई. दूसरी ओर, मोहसिन खान ने अपनी साबित किया कि मॉडर्न टी20 क्रिकेट में केवल रफ्तार ही काफी नहीं है. मयंक के लिए यह एक ‘वेक-अप कॉल’ है कि उन्हें गति के साथ-साथ अब दिमागी गेंदबाजी और स्किल्स पर काम करना होगा.कभी 156.7 kmph स्पीड से फेंकी गेंद...कमबैक मैच में विकेट को तरसा गेंदबाजZoomमयंक यादव ने 4 ओवर में 56 रन लुटाए.

नई दिल्ली. आईपीएल 2024 की वो रात शायद ही कोई क्रिकेट प्रेमी भूल पाए, जब लखनऊ के इकाना स्टेडियम में 156.7 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से एक ऐसी सनसनी निकली जिसने दुनिया भर के बल्लेबाजों को हिला कर रख दिया था. मयंक यादव एक ऐसा नाम जो रातों-रात भारतीय तेज गेंदबाजी का भविष्य बन गया. लेकिन चोट के लंबे अंतराल के बाद जब उसी इकाना के मैदान पर मयंक ने वापसी की, तो कहानी पूरी तरह बदली हुई नजर आई. राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में मयंक की रफ्तार तो दिखी, लेकिन वो ‘धार’ गायब थी जिसने उन्हें खास बनाया था.

राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के गेंदबाजों ने शानदार अनुशासन दिखाया और विपक्षी टीम को महज 159 रनों पर रोक दिया. जहां पूरी टीम 8 रन प्रति ओवर से कम की इकॉनमी से गेंदबाजी कर रही थी, वहीं मयंक यादव (Mayank Yadav) अकेले ऐसे गेंदबाज थे जिन्हें बल्लेबाजों ने निशाने पर लिया. अपने कोटे के 4 ओवरों में मयंक ने 56 रन लुटाए, जबकि टीम के किसी भी अन्य गेंदबाज ने 30 का आंकड़ा भी पार नहीं किया. हैरानी की बात यह थी कि मयंक अभी भी 149.4 किमी प्रति घंटे की रफ्तार छू रहे थे.लेकिन आधुनिक टी20 क्रिकेट का सबसे कड़वा सच यही है कि अगर आपके पास सिर्फ गति है और दिशा नहीं, तो बल्लेबाज उसी गति का इस्तेमाल बाउंड्री बटोरने के लिए करता है. मयंक के साथ ठीक यही हुआ, उनकी गेंदें अक्सर पैड्स पर ड्रिफ्ट हुईं, जिससे उन्हें खेलना बेहद आसान हो गया.

मयंक यादव ने 4 ओवर में 56 रन लुटाए.

मोहसिन खान का आदर्श उदाहरणमयंक यादव की इस विफलता के बीच उनके साथी गेंदबाज मोहसिन खान ने एक मास्टरक्लास पेश की. मोहसिन भी मयंक की तरह ही गंभीर चोटों से जूझकर लौटे हैं, लेकिन उन्होंने अपनी गेंदबाजी में जो बदलाव किए हैं, वो मयंक के लिए एक सबक की तरह हैं. मोहसिन ने दिखाया कि केवल तेज फेंकना ही काफी नहीं है, बल्कि मिश्रण ही असली चाबी है. जहां मयंक केवल ‘कटर’ और ‘फास्ट बॉल’ के बीच झूल रहे थे, वहीं मोहसिन ने मैदान पर शतरंज की बिसात बिछा रखी थी. मोहसिन ने पावरप्ले में ‘हार्ड लेंथ’ पर गेंदें फेंकी और उसके बाद अपनी गति के साथ खिलवाड़ किया. उन्होंने वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा बल्लेबाज को 5 डॉट गेंदें डालकर दबाव बनाया, जो आईपीएल इतिहास में एक दुर्लभ दृश्य है. इसके बाद, शिमरॉन हेटमायर जैसे पावर-हिटर को उन्होंने अपनी दिमागी गेंदबाजी से मात दी। 115 की स्लोअर बॉल के बाद अचानक 139 की रफ्तार वाली हार्ड लेंथ गेंद ने हेटमायर को चकमा दे दिया और वो टॉप-एज देकर पवेलियन लौट गए.

अनुभव और कौशल का अंतरमोहसिन और मयंक की तुलना में यह साफ दिखा कि चोट के दौरान मोहसिन ने अपने ‘अस्त्रों’ (Arsenal) पर काम किया है. वहीं मयंक की गेंदबाजी में अभी भी वो पुराना एकतरफा अंदाज नजर आता है. प्रिंस यादव ने भी मयंक के लिए उदाहरण पेश किया, जिन्होंने अपने पहले ओवर में 13 रन खाने के बाद शानदार वापसी की और अगले 3 ओवरों में सिर्फ 16 रन देकर 2 विकेट झटके. मयंक यादव का रिकॉर्ड (156.7 किमी प्रति घंटा) उन्हें इतिहास के पन्नों में तो दर्ज कराता है, लेकिन मैदान पर सफलता के लिए उन्हें अपनी स्किल्स को अपग्रेड करना होगा. रफ्तार एक उपहार है, लेकिन नियंत्रण और दबाव झेलने की क्षमता एक साधना है.

मयंक के लिए आगे की राहयह आलोचना मयंक को नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें आईना दिखाने के लिए है. दो बड़ी चोटों के बाद भी 150 की रफ्तार के करीब गेंदबाजी करना उनकी शारीरिक क्षमता का प्रमाण है. लेकिन अगर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की करनी है, तो उन्हें मोहसिन खान की तरह विविधताएं विकसित करनी होंगी. मोहसिन ने दिखाया है कि कैसे इंजरी के ब्रेक का इस्तेमाल नई गेंदे सीखने में किया जा सकता है. मयंक के पास अभी समय है, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि आईपीएल जैसे मंच पर केवल गति के भरोसे टिकना नामुमकिन है. आने वाले मैचों में अगर मयंक अपनी लाइन-लेंथ और स्लोअर बॉल्स पर नियंत्रण पा लेते हैं, तो वह फिर से वही ‘खौफनाक मयंक’ बन सकते हैं जिसने 2024 में आरसीबी के खिलाफ कहर ढाया था.

About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

April 22, 2026, 22:25 IST

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