Hariyali Teej 2026: क्या आपने भी रखा है सावनी तीज का व्रत? इन 3 संकल्पों के बिना है अधूरा, जानें पूजा विधि

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क्या आपने भी रखा है सावनी तीज का व्रत? इन 3 संकल्पों के बिना है अधूरा
Last Updated:August 15, 2026, 09:20 IST
Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है, जिसे सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए मनाती हैं. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. महिलाएं सोलह श्रृंगार कर मेहंदी लगाती हैं, झूले झूलती हैं और लोकगीतों के साथ उत्सव मनाती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था. करौली के आध्यात्मिक गुरु पंडित हरिमोहन शर्मा के अनुसार इस दिन विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. व्रत के साथ छल-कपट, झूठ-दुर्व्यवहार और परनिंदा से दूर रहने का संकल्प भी महत्वपूर्ण माना गया है.
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हरियाली तीज सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है
करौली. सावन मास में मनाया जाने वाला हरियाली तीज यानी सावनी तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं. सावन में चारों ओर हरियाली छाने के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर हाथों में मेहंदी लगाती हैं और झूले झूलकर लोकगीतों के साथ उत्सव मनाती हैं.
हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में लोकप्रिय है. कई स्थानों पर इस अवसर पर मेले आयोजित होते हैं और माता पार्वती की सवारी भी निकाली जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाया जाता है.
हरियाली तीज की पूजा विधि
करौली के आध्यात्मिक गुरु पंडित हरिमोहन शर्मा बताते है कि मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.पूजा के लिए सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर चौकी को सजाया जाता है. इसके बाद मिट्टी में गंगाजल मिलाकर भगवान शिव का शिवलिंग, माता पार्वती, भगवान गणेश और माता पार्वती की सखियों की प्रतिमाएं बनाई जाती है. इसके बाद देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन किया जाता है. महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री, फल, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करती हैं. कई स्थानों पर महिलाएं रातभर जागरण और कीर्तन भी करती हैं.
इन तीन संकल्पों के बिना अधूरा माना जाता है व्रत
हरियाली तीज केवल पूजा और उपवास का पर्व नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन में अच्छे आचरण का संकल्प लेने का अवसर भी माना जाता है. इस दिन महिलाओं को तीन बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए. पति के प्रति छल-कपट न करना, झूठ और दुर्व्यवहार से बचना और परनिंदा यानी दूसरों की बुराई न करना
क्या है हरियाली तीज की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी. लंबे समय तक तप करने के बाद भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया.मान्यता है कि श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था. इसी कारण हरियाली तीज को सुहाग और सौभाग्य से जुड़ा पर्व माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और विश्वास मजबूत होता है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Karauli,Rajasthan
First Published :
August 15, 2026, 09:20 IST
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