Thalapathy Vijay | Tamil Nadu politics | AIADMK | थलापति विजय का साथ देकर फंसे AIADMK के 25 विधायक! गर्दन पर लटकी तलवार, तमिलनाडु में होंगे ये 5 खेल?

Thalapathy Vijay AIADMK News: थलापति विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं. चुनाव में टीवीके को जीताकर गठबंधन की सरकार बना चुके हैं. तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट वाली परीक्षा भी पास कर चुके हैं. उनके सामने अब कोई मुसीबत नहीं है. मगर उन्हें सपोर्ट करने वाले एआईएडीएमके के बागी विधायक फंस चुके हैं. जी हां, थलापति विजय का साथ देकर AIADMK के 25 बागी विधायक बुरी तरह फंस चुके हैं. उनके ऊपर अब अयोग्यता की तलवार लट गई है. अगर ये बागी विधायक दो-तिहाई विधायकों की संख्या को पूरा नहीं कर पाते हैं तो तमिलनाडु में नया खेल हो जाएगा.
दरअसल, तमिलनाडु में बुधवार को मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार ने विश्वास मत में 25 बागी AIADMK विधायकों के समर्थन से विधानसभा में भारी बहुमत हासिल किया. इसके साथ ही राज्य में जबरदस्त सियासी ड्रामा का आगाज हो गया. सीएम विजय के नेतृत्व वाली टीवीके यानी तमिलगा वेत्त्री कझगम ने कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), सीपीआई, सीपीआई(एम) और विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची (VCK) के समर्थन से 120 विधायकों के साथ सरकार बनाई. हालांकि, फ्लोर टेस्ट में थलापति विजय की सरकार को 144 विधायकों का साथ मिला.
इस तरह थलापति विजय की सरकार की मुसीबत तो टल गई, मगर AIADMK के बागी गुट के सामने अब मुसीबत का पहाड़ है. जी हां, एआईएडीएमके के बागी गुट का नेतृत्व एसपी वेलुमणि और सी वे शन्मुगम कर रहे हैं. उन्होंने पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी पर स्टालिन की डीएमके के साथ सरकार बनाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए थलापति विजय को बाहरी समर्थन दिया. बाद में पलानीस्वामी ने इन सभी 25 नेताओं को पार्टी के पदों से हटा दिया. अब सवाल है कि जब पलानीस्वामी ने एआईएडीएमके के बागी गुट वाले 25 विधायकों को पार्टी से निकाल दिया तो इनका क्या होगा? चलिए समझते हैं.
चेन्नई में एक बैठक के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय AIDMK नेताओं सी.वी. शनमुगम, एस.पी. वेलुमणी और अन्य के साथ.
अब आगे क्या होगा? 5 संभावित स्थितियांफ्लोर टेस्ट के बाद अब सबकी नजरें एआईएडीएमके के बागी गुट के कानूनी और संवैधानिक भविष्य पर टिकी हैं. यहां पांच संभावित स्थितियां होती दिख रही हैं.
1. अयोग्यता की तलवार
एआईएडीएमके के बागी गुट के पास फिलहाल केवल 25 विधायक हैं. यह दो-तिहाई यानी 32 विधायकों से कम है. अगर पलानीस्वामी स्पीकर को औपचारिक नोटिस देते हैं तो इन 25 विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है. मध्य प्रदेश (2020) और कर्नाटक (2019) के उदाहरणों के अनुसार, पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर स्पीकर इन्हें अयोग्य घोषित कर सकते हैं.
2. मैजिक नंबर 32 की तलाश
एक ही शर्त पर इन विधायकों की राह आसान हो सकती है. वह है मैजिक नंबर 32. जी हां, एआईएडीएमके बागी गुट का मुख्य लक्ष्य 32 विधायकों की संख्या तक पहुंचना है. अगर वे पलानीस्वामी वाले गुट से सात और विधायकों को अपने साथ कर लेते हैं तो बागी विधायकों की संख्या 32 हो जाेगी. ऐसे में वे कानूनी रूप से असली AIADMK होने का दावा कर सकते हैं या किसी अन्य पार्टी में विलय कर सकते हैं, बिना अपनी सीट गंवाए. तब तक वे कानूनी संकट में ही रहेंगे.
3. उपचुनाव
अगर इन 25 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाता है, तो तमिलनाडु में इन 25 सीटों पर उपचुनाव होंगे. यह मुख्यमंत्री विजय के लिए बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों तक पहुंचने का बड़ा मौका और जोखिम दोनों है. लेकिन EPS यानी पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली AIADMK या कमजोर हुई DMK भी इन उपचुनावों के जरिए अपनी खोई जमीन वापस हासिल करने की कोशिश कर सकती है.
4. ‘इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव’ रणनीति
अयोग्यता का इंतजार करने की बजाय बागी विधायक तुरंत इस्तीफा देकर औपचारिक रूप से TVK में शामिल हो सकते हैं. इससे तुरंत उपचुनाव होंगे, लेकिन वे सत्तारूढ़ सरकार के समर्थन के साथ TVK के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं.
5. लंबी कानूनी लड़ाई
अगर इन बागियों को अयोग्य घोषित किया जाता है, तो कानूनी लड़ाई तय है, लेकिन उनके पक्ष में संभावना कम है. संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत दो-तिहाई संख्या पूरी न करने वाले गुटों को कोई खास सुरक्षा नहीं मिलती. बागी विधायक ‘वैचारिक मतभेद’ या पार्टी नेतृत्व की ‘दुर्भावना’ का तर्क दे सकते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में स्पीकर के अधिकार को बरकरार रखा गया है. जब तक बागी गुट सात और विधायकों को साथ नहीं लाता और 32 का आंकड़ा नहीं छूता, तब तक अदालत से अयोग्यता रद्द होने की संभावना नहीं है, क्योंकि कानून ‘आंशिक विभाजन’ को दल-बदल के खिलाफ वैध बचाव नहीं मानता.



