बॉलीवुड का वो ‘साइलेंट’ सुपरस्टार, जो बना मल्टी-स्टारर फिल्मों का ‘मसीहा’, अमिताभ बच्चन के साथ खूब जमती थी जोड़ी

Last Updated:April 21, 2026, 12:43 IST
70 और 80 के दशक में जब अमिताभ बच्चन का ‘एंग्री यंग मैन’ अवतार बॉक्स ऑफिस पर आग लगा रहा था, तब एक ‘चॉकलेटी’ लड़का अपनी मासूम मुस्कान और स्वेटर लुक से दिल जीत रहा था. वो नाम था ऋषि कपूर. ऋषि कपूर न सिर्फ एक बेहतरीन सोलो स्टार थे, बल्कि बॉलीवुड की मल्टी-स्टारर फिल्मों के साइलेंट सुपरस्टार भी थे, जिनके बिना बड़ी फिल्में अधूरी लगती थीं. खासकर अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी ने पर्दे पर ऐसा जादू चलाया जिसने भाईचारे और दोस्ती को नई पहचान दी.
नई दिल्ली. ऋषि कपूर का जन्म कपूर खानदान में हुआ था, जहां एक्टिंग खून में थी. साल 1973 में आई फिल्म ‘बॉबी’ से रातोंरात सुपरस्टार बने ऋषि कपूर ने बॉलीवुड को रोमांस का एक नया चेहरा दिया, लेकिन 70 के दशक के आखिर में सिनेमा की दिशा बदल रही थी. दर्शकों को अब सिर्फ रोमांस नहीं, एक्शन और ड्रामा चाहिए था. यह वह दौर था जब मल्टी-स्टारर फिल्में पॉपुलर हो रही थीं और ऋषि कपूर ने अपनी स्ट्रेटेजी बदलते हुए खुद को इन फिल्मों का एक जरूरी हिस्सा बना लिया. (तस्वीर को बनाने में एआई की मदद ली गई है.)
ऋषि कपूर अच्छी तरह समझते थे कि अमिताभ बच्चन जैसे बड़े एक्टर के साथ सोलो फिल्मों में काम करना रिस्की हो सकता है. लेकिन उन्होंने इसे अपनी ताकत बनाया, कमजोरी नहीं. वे एक ऐसे एक्टर के तौर पर उभरे जिन्होंने किसी भी बड़े स्टार के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए भी अपनी मौजूदगी बनाए रखी. इस फिल्म को कौन भूल सकता है? जहां अमिताभ बच्चन ने ‘एंथनी’ के रोल में और विनोद खन्ना ने ‘अमर’ का सीरियस रोल किया, वहीं ऋषि कपूर ने ‘अकबर इलाहाबादी’ के रोल में फिल्म में ऐसी एनर्जी और मस्ती भरी जो आज भी मिसाल है. ‘पर्दा है पर्दा’ गाने में उनकी परफॉर्मेंस ने साबित कर दिया कि वे किसी भी फ्रेम में शो चुरा सकते हैं.
ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन ने आधा दर्जन से ज्यादा फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘कभी कभी’, ‘नसीब’, ‘कुली’, ‘अजूबा’ और साल 2018 की ‘102 नॉट आउट’ शामिल हैं. उनकी जोड़ी की खासियत यह थी कि अमिताभ अक्सर बड़े भाई या रक्षक का रोल निभाते थे, जबकि ऋषि कपूर छोटे भाई का, अपनी मासूमियत और रोमांस से फिल्म में बैलेंस बनाते थे.
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जब दोनों ‘नसीब’ के गाने ‘जॉन जॉनी जनार्दन’ में साथ दिखे, तो थिएटर में तालियां रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीं. ऋषि कपूर जानते थे कि अमिताभ एक्शन के किंग हैं, इसलिए उन्होंने फिल्म के इमोशनल और रोमांटिक पहलुओं को संभाला. यही वजह थी कि इन फिल्मों ने हर तरह के दर्शकों को अपनी ओर खींचा.
80 के दशक में जब फिल्में हिंसा और बदले पर आधारित होती थीं, ऋषि कपूर अकेले ऐसे योद्धा थे जिन्होंने रोमांस की मशाल जलाए रखी. ‘कर्ज’, ‘प्रेम रोग’ और ‘सागर’ जैसी फिल्मों के जरिए, उन्होंने साबित कर दिया कि वह भीड़ का हिस्सा नहीं, बल्कि भीड़ खींचने वाले थे. हालांकि, उनकी सबसे बड़ी सफलताएं अक्सर मल्टी-स्टारर फिल्मों से मिलीं, जहां उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा, राकेश रोशन और जितेंद्र जैसे सितारों के साथ काम किया, लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनकी केमिस्ट्री अनोखी थी.
ऋषि कपूर ने अपनी बायोग्राफी, ‘खुल्लम खुल्ला’ में माना कि शुरू में उन्हें लगता था कि अमिताभ बच्चन मल्टी-स्टारर फिल्मों का सारा क्रेडिट ले जाते हैं. लेकिन समय के साथ, उन्हें अपनी अहमियत का एहसास हुआ. वह जानते थे कि अमिताभ के एंग्री यंग मैन को बैलेंस करने के लिए हमेशा एक नरम दिल और चंचल ‘चिंटू’ की जरूरत होगी. यही वजह है कि उनकी फिल्में आज भी इतनी फ्रेश लगती हैं.
जब यह जोड़ी 2018 में ‘102 नॉट आउट’ में 27 साल बाद एक साथ लौटी, तो दर्शक भावुक हो गए. इसमें अमिताभ 102 साल के पिता बने थे और ऋषि 75 साल के बेटे. इस फिल्म ने दिखाया कि समय के साथ इन दोनों दिग्गजों के बीच का रिश्ता और गहरा होता गया है. अपनी आखिरी पारी में भी ऋषि कपूर ने साबित कर दिया कि वह एक ऐसे कलाकार थे जिन्हें किसी बड़ी इमेज की जरूरत नहीं थी. उनकी एक्टिंग ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी. आज भले ही, ऋषि कपूर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें आज भी उनके फैंस के दिलों में जिंदा हैं.
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April 21, 2026, 12:43 IST



