किसानों के लिए वरदान है यह योजना, आसानी से खरीद सकते हैं कृषि उपकरण, सरकार देती है ब्याज मुक्त लोन

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किसानों के लिए वरदान है यह योजना, आसानी से खरीद सकते हैं कृषि उपकरण
Last Updated:May 05, 2026, 15:27 IST
Custom Hiring Scheme: कस्टम हायरिंग योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी राहत बन रही है. इस योजना के तहत ट्रैक्टर, रोटावेटर और हार्वेस्टर जैसे महंगे कृषि उपकरण किराए पर कम लागत में उपलब्ध कराए जाते हैं. कृषि विभाग के अनुसार जेएसएस, केवीएस और एफपीओ को यंत्र खरीद पर 90% सब्सिडी दी जाती है, जबकि व्यक्तिगत किसानों को 40% सब्सिडी मिलती है. इससे खेती आधुनिक बन रही है और लागत घट रही है. योजना से किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
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भरतपुर. किसानों के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं निकलती हैं. जिनका लाभ लेकर किसान खेती में आगे बढ़ सकते हैं.और कई नवाचार कर सकते हैं. इन्हीं में से एक है कस्टम हायरिंग योजना, जो सकरार की एक महत्वपूर्ण पहल है. इस येजना के तहत महंगे कृषि उपकरण किराए पर उपलब्ध कराए जाते हैं. राजस्थान के भरतपुर जैसे क्षेत्रों में छोटे और सीमांत किसानों को इससे बड़ी राहत मिल रही है. इस योजना के माध्यम से ट्रैक्टर, रोटावेटर, हार्वेस्टर जैसी मशीनें कम लागत में मिलती हैं. जिससे खेती आसान और आधुनिक बनती है.
कृषि विभाग के अधिकारी ने योजना की जानकारी विस्तार से दी है. जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है. कृषि विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर राधेश्याम चौधरी ने लोकल 18 को बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर चलाया जा रहा है. जिसमें जेएसएस, केवीएस, एफपीओ और किसानों को यंत्र खरीदने के लिए प्रावधान किया गया है. जेएसएस, केवीएस, एफपीओ द्वारा जो भी यंत्र खरीदा जाएगा उस पर 90% सब्सिडी है.
किसान 30 लाख तक का खरीद सकते हैं कृषि उपकरण
यदि किसान व्यक्तिगत रूप से खरीदता है तो उसके लिए 40% सब्सिडी है. इसमें ट्रैक्टर और थ्रेसर हो सकता है. किसान सीड ड्रिल और एमबी प्लो भी ले सकते हैं. इसके अलवा लेवलर और कल्टीवेटर भी किसान ले सकते हैं. जुताई से लेकर निराई और गुड़ाई से संबंधित यंत्र भी कस्टम हायरिंग सेंटर से ले सकते हैं. इस योजना की खास बात यह है कि किसान 30 लाख रुपये तक का कृषि उपकरण क्रय कर सकता है, जिसमें किसानों को लोन कराना अनिवार्य होता है. यदि किसान लोन कराता है और लोन स्वीकृत हो जाता है तो उसकी जो 40% राशि है, वह कार्यालय में 4 साल तक जमा रहती है.
किसानाें को मिलता है ब्याज मुक्त लोन
ज्वाइंट डायरेक्टर राधेश्याम चौधरी ने बताया कि लोन लेने पर किसी तरह का ब्याज नहीं लगता है और 4 साल तक यदि कस्टम हायरिंग सेंटर का संचालन किया जाता है तो वह राशि उसे बैंक में ट्रांसफर कर दी जाती है. इसके अलावा किसानों को जागरूक करने के लिए हमारे जो फील्ड अधिकारी हैं, गांव-गांव जाकर इसके बारे में बता रहे हैं. साथ ही किसानों को प्रशिक्षणों के माध्यम से यह संदेश पहुंचाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ ले सकें.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Bharatpur,Rajasthan



