आसमान के ‘सौर सम्राट’ का दुखद अंत, जासूसी के चक्कर में समंदर में समाया दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लेन

Last Updated:May 13, 2026, 01:18 IST
दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा से चलने वाले विमान सोलर इम्पल्स 2 का एक दुखद हादसे का शिकार हो गया. 4 मई को मैक्सिको की खाड़ी के ऊपर परीक्षण उड़ान के दौरान बिजली गुल होने के कारण यह ऐतिहासिक विमान समंदर में गिर गया. कभी दुनिया भर की परिक्रमा कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला यह विमान, हाल ही में सैन्य निगरानी और जासूसी के लिए संशोधित किया गया था. इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन विमान के पूरी तरह नष्ट होने से विमानन इतिहास के एक प्रेरणादायक अध्याय का अंत हो गया है.
दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लेन क्रैश हो गया.
Solar Impulse Flight Crashes: सौर ऊर्जा से चलने वाली विमान क्रैश हो गई. ये विमान सौर ऊर्जा से पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर इतिहास रच दिया था. अब ये सोलर इम्पल्स 2 अब इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह गया है. नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) की रिपोर्ट के अनुसार, 4 मई को एक ऑटोनोमस उड़ान के दौरान पावर लॉस के कारण यह विमान मैक्सिको की खाड़ी में गिरकर तबाह हो गया.
सोलर इम्पल्स 2 की कहानी जितनी गौरवशाली थी, उसका अंत उतना ही विवादास्पद रहा. इसे स्विस कंपनी ने बनाया था. बर्ट्रेंड पकार्ड और आंद्रे बोर्शबर्ग द्वारा निर्मित इस विमान का उद्देश्य टिकाऊ ऊर्जा का प्रचार करना था. 2016 में इसने बिना एक बूंद ईंधन के पूरी दुनिया की यात्रा पूरी कर सबको हैरान कर दिया था.
बेचने के बाद बदली इस विमान की रोल
2019 में इसे ‘स्काईड्वेलर एयरो’ नाम के स्पेनिश-अमेरिकी कंपनी को बेच दिया गया. कंपनी ने इस शांति के दूत को एक ‘मिलिट्री सर्विलांस’ मशीन में बदल दिया. इसमें रडार, इलेक्ट्रॉनिक ऑप्टिक्स और फोन टैपिंग जैसे जासूसी उपकरण लगाए गए थे. कंपनी का लक्ष्य इसे एक ऐसे ड्रोन में तब्दील करना था जो हफ्तों तक बिना रुके सीमा की निगरानी कर सके.
हादसे की रात क्या हुआ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान ने मिसिसिपी के स्टेनिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी. यह एक मानवरहित उड़ान थी, जिसे कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था. उड़ान के दौरान अचानक विमान ने अपनी शक्ति खो दी और वह सीधे समुद्र में जा गिरा. गनीमत यह रही कि विमान में कोई पायलट मौजूद नहीं था, जिससे जानमाल का नुकसान टल गया.
एक इंजीनियरिंग चमत्कार का अंत
सोलर इम्पल्स 2 किसी चमत्कार से कम नहीं था। इसकी कुछ विशेषताएं इसे दुनिया का सबसे अनोखा विमान बनाती थीं:
विशाल पंख: इसका विंगस्पैन 232 फीट था, जो बोइंग 747 से भी बड़ा था.
हल्का वजन: कार्बन फाइबर से बने होने के कारण इसका वजन मात्र 5,100 पाउंड (एक एसयूवी के बराबर) था.
सौर शक्ति: इसके पंखों पर 17,248 फोटोवोल्टिक सेल लगे थे, जो 66 किलोवाट बिजली पैदा करते थे.
अजेय क्षमता: यह 39,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम था.
निर्माताओं ने जताया दुख
विमान के मूल निर्माता बर्ट्रेंड पकार्ड और आंद्रे बोर्शबर्ग ने इस पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पॉपुलर साइंस को दिए एक बयान में कहा, ‘हमें सोशल मीडिया के जरिए इस दुर्घटना का पता चला। सोलर इम्पल्स टीम एक महत्वपूर्ण तकनीकी ध्वजवाहक के खोने से बेहद दुखी है।’ हैरानी की बात यह है कि मूल कॉन्ट्रेंक्ट के अनुसार, इस विमान को स्विट्जरलैंड के लुसर्न स्थित ‘स्विस म्यूजियम ऑफ ट्रांसपोर्ट’ में रखा जाना था लेकिन, अब यह विमान संग्रहालय की शोभा बढ़ाने के बजाय समुद्र की गहराइयों में दफन हो चुका है।
भविष्य पर सवाल
स्काईड्वेलर एयरो का सपना मियामी से रियो डी जनेरियो के बीच ऐसे विमानों का बेड़ा तैनात करना था जो उपग्रहों से कम लागत पर सैन्य और व्यावसायिक डेटा प्रदान कर सकें। इस क्रैश ने अब सौर ऊर्जा संचालित लंबी दूरी के ड्रोन्स की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बर्ट्रेंड पकार्ड ने कभी कहा था कि ‘पहला विमान 2007 की तकनीक था, लेकिन दूसरा (सोलर इम्पल्स 2) भविष्य की तकनीक थी।’ आज उस ‘भविष्य’ का अंत मैक्सिको की खाड़ी की लहरों के बीच हो गया।
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