Kis Chij Ki Kheti Me Sabse Jyada Fayda Hai | Agriculture News | बीटी कपास की खेती है किसानों के लिए वरदान, है फायदे का सौदा, बस जान लें ये कुछ ट्रिक!

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कपास की खेती है किसानों के लिए वरदान, है फायदे का सौदा,बस जान लें ये कुछ ट्रिक
Last Updated:May 04, 2026, 11:18 IST
Kapaas Ki Kheti Kaise Karein: आज के समय में हर किसान ऐसी चीजों की खेती करना चाहता है जिससे मुनाफा ज्यादा हो. कई बार किसान भाई पारंपरिक फसलों से नुकसान झेलकर हर जाते हैं. उनके लिए एक गजब का टिप है. उन्हें बीटी कपास की खेती करनी चाहिए. इसमें भरपूर मुनाफा है. नागौर क्षेत्र में बीटी कपास बुवाई का सही समय 20 मई तक है. एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बीज उपचार के तरीके बताए हैं. साथ में बताएं हैं कि किस विधि से खेती करें कि यह जबरदस्त पैदावार दे.
Agriculture News: खरीफ सीजन के आते ही किसानों ने कपास की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह बिजारणियां ने बताया कि नागौर सहित आसपास के क्षेत्र में बीटी कपास की बुवाई का यही सही समय है. उन्होंने बताया कि बीटी कपास की बुवाई का समय 20 मई तक माना जाता है. इससे फसल को उसी तरह की जलवायु मिलती है जो उसे चाहिए. इससे उत्पादन बेहतर होता है. इसके अलावा समय पर बुवाई करने से पौधों की वृद्धि ठीक तरह से होती है और कीट-रोगों का असर और प्रकोप भी कम होता है.
वहीं, अधिक पैदावार के लिए बीज का सही तरीके से रखरखाव बेहद आवश्यक है. बीज को एक ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन, एक ग्राम व्यापारिक गंधक और 10 लीटर पानी के घोल में डालकर उपचारित करने से फसल का उत्पादन बढ़ता है. रोयेदार बीज की मात्रा 5 से 6 किलोग्राम रखी जाती है, जिसे 6-8 घंटे तक घोल में रखना लाभकारी होता है. वहीं, बिना रोयेदार बीज के लिए उपचार की अवधि कम रखी जाती है. जिन क्षेत्रों में दीमक की समस्या अधिक होती है, वहां प्रति किलो बीज में 10 एमएल क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी मिलाकर उपचार करना चाहिए. उपचार के बाद बीज को छाया में 30-40 मिनट तक सुखाकर ही बुवाई करनी चाहिए.
कमसे कम इतने सेंटीमीटर की गहराई पर ही बीज बोना चाहिएबुवाई की विधि को लेकर एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि कपास की बुवाई बीज-उर्वरक संयुक्त ड्रिल या प्लांटर से करना सबसे उपयुक्त रहता है. इससे बीज की गहराई और दूरी समान रहती है, जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है. बीज को 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना चाहिए. सामान्य कपास के लिए कतार से कतार की दूरी 67.5 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है. वहीं संकर एवं बीटी कपास के लिए पौधों के बीच दूरी 60 सेंटीमीटर तक रखी जा सकती है या 100 सेंटीमीटर कतार दूरी के साथ 45 सेंटीमीटर पौध दूरी अपनाई जा सकती है.
पश्चिम दिशा में कतारें बनाकर करे कपास की खेती इसके अलावा पछेती बुवाई की स्थिति में पौधों के बीच दूरी कम रखनी चाहिए. वहीं, बीज की मात्रा भी बढ़ा देनी चाहिए. ताकि प्रति इकाई क्षेत्र में पौध संख्या संतुलित बनी रहे. इसके अलावा खेत की अच्छी तैयारी, उचित नमी और उर्वरकों का संतुलित उपयोग भी पैदावार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया कि विशेष रूप से पूर्व से पश्चिम दिशा में कतारें बनाकर कपास की बुवाई करने की सलाह दी है. इस पद्धति से पौधों को दिनभर समान रूप से सूर्य का प्रकाश मिलता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बेहतर होती है और पौधों की वृद्धि तेज होती है. इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी होती है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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