जापान में क्यों बढ़ रहे मुस्लिम और मस्जिद? कितने लोग हुए इस्लाम में कन्वर्ट, जानिए कितनी है आबादी

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जापान में क्यों बढ़ रहे मुस्लिम और मस्जिद? कितने लोग हुए इस्लाम में कन्वर्ट
Last Updated:April 16, 2026, 13:14 IST
Muslim in Japan: जापान की पहचान धार्मिक उदारता वाले देश के तौर पर है. आमतौर पर शांत संस्कृति वाले जापानी पिछले कुछ दिनों से विरोध कर रहे हैं. ये विरोध सदन से लेकर सड़कों तक नजर आ रहा है. मौजूदा प्रदर्शन एक प्रस्तावित मस्जिद को लेकर है लेकिन इसके पीछे मुस्लिमों की बढ़ती आबादी और जनसांख्यिकीय परिवर्तन को लेकर स्थानीय समाज में बढ़ती सुगबुगाहट को असली वजह करार दिया जा रहा है. देश में लगातार बढ़ती मस्जिदों की संख्या और ‘अजान’ से होने वाले शोर और अपनी संस्कृति पर मंडराते खतरे को लेकर नारेबाजी कर रहे हैं. यहां फुजीसावा शहर में बड़ी संख्या में जापानी लोगों ने प्रदर्शन किया. आइए यहां समझते हैं कि जापान में मुस्लिम आबादी क्यों बढ़ती जा रही है, जिसका एक हिस्सा धर्म परिवर्तन किए हुए लोगों का भी है. इस बढ़ोत्तरी की वजह और टोक्यो सरकार का रवैया क्या है?
जापान के फुजीसावा शहर में एक प्रस्तावित मस्जिद को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने जापान की पहचान और इमिग्रेशन पर एक नई बहस छेड़ दी है. मुस्लिम आबादी में तेजी से हो रही वृद्धि के बीच, यह तनाव आर्थिक जरूरतों और बदलते समाज की चिंताओं के बीच टकराव को दर्शाता है. पिछले कुछ दिनों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं. सोशल मीडिया पर साझा किए गए कई वीडियो में हजारों निवासियों को शहर की पहली मस्जिद के निर्माण के खिलाफ इकट्ठा होते देखा जा सकता है. यह मुद्दा केवल स्थानीय ज़ोनिंग विवाद तक सीमित नहीं रह गया है. (सभी फोटो- रॉयटर्स)
जापानी प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे और तख्तियां लिए हुए थे. उनका दावा है कि प्रस्तावित ढांचा पास के ऐतिहासिक शिंटो मंदिरों से काफी बड़ा होगा. कई लोगों ने इसको जापान की सांस्कृतिक परंपराओं के खिलाफ एक ‘उकसावा’ बताया है. मस्जिद को लेकर हुई सार्वजनिक बैठकों में भी काफी तनाव देखा गया. व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. लगातार विरोध के जवाब में ‘फुजीसावा मस्जिद’ के एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘हम जापान से प्यार करते हैं और हम सभी नियमों का पालन करेंगे.’
यह विरोध प्रदर्शन पिछले 15 सालों में पूरे जापान में मुस्लिम आबादी में हुई बढ़ोत्तरी के बैकग्राउंड में हो रहा है. 19वीं सदी में व्यापार और डिप्लोमेसी के लिए मुस्लिम देशों का जापान से संपर्क शुरू हुआ. आज बड़ा सवाल जापान में मुस्लिम आबादी को लेकर है. जापान के कोब शहर में साल 1935 जापान की पहली मस्जिद बनी थी. 1999 में यहां 15 मस्जिद थी. 2008 तक यह आंकड़ा 50 और फिर 2025 के अंतिम तक यह संख्या 160 से अधिक दर्ज की गई.
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वासेदा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस हिरोफुमी तानादा के अनुमानों के अनुसार 2024 के अंत तक देश में मुसलमानों की संख्या लगभग 4 लाख 20 हजार तक पहुंच गई है. यह 2010 की तुलना में बहुत बड़ी वृद्धि है, जब यह संख्या लगभग एक लाख के आसपास थी. जापान में लगभग 90 प्रतिशत मुस्लिम विदेशी नागरिक हैं, जबकि बाकी के 10 प्रतिशत में धर्म परिवर्तन करने वाले जापानी और मिक्स विरासत वाले लोग शामिल हैं. यानी कन्वर्ट होने का रेट भी बढ़ा है.
मुस्लिम जनसंख्या में वृद्धि जापान की आर्थिक जरूरतों से जुड़ी है. घटते कार्यबल और बुजुर्ग होती आबादी का सामना कर रहे जापान ने विदेशी श्रम के लिए रास्ते खोल दिए हैं. यहां मुस्लिम प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया से आया है. इन लोगों का यहां आना ट्रेनिंग प्रोग्राम और आर्थिक भागीदारी समझौते (EPA) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हुआ है. खास तौर पर केयरगिविंग और नर्सिंग जैसे सेक्टर में. इस जनसांख्यिकीय बदलाव के साथ धार्मिक बुनियादी ढांचे का भी विस्तार हुआ है. मस्जिदों की संख्या 2008 में लगभग 50 थी, जो जुलाई 2025 तक बढ़कर कम से कम 164 हो गई है. (फोटो- जापान में रमजान मनाते मुस्लिम)
जापान में हालांकि अभी कुल आबादी के हिसाब से देखा जाए तो मुस्लिम महज 0.3 प्रतिशत हैं. यहां ओसाका, टोक्यो, नागोया और योकोहामा जैसे प्रमुख शहरों में मुस्लिम आबादी अधिक है. इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और ईरान जैसे देशों से इमिग्रेशन की वजह से मुस्लिम आबादी बढ़ रही है. स्थानीय जापानी लोगों का इस्लाम अपनाने की वजह में शादी के साथ ही पर्सनल रूचि भी अहम वजह है.
इस विवाद का एक अहम पॉइंट अंतिम संस्कार की प्रथाएं हैं. जापान में 99 प्रतिशत से अधिक मामलों में शवदाह करने की परंपरा है. वहीं इस्लामी परंपरा दफनाने का आदेश देती हैं. जापानी लोगों ने आपत्ति जताते हुए प्रदूषण और भूजल प्रदूषण पर चिंता जाहिर की है. इसके अलावा, कब्रिस्तान के लिए सीमित जगह ने भी तनाव बढ़ाया है. जापान में वर्तमान में केवल लगभग दस कब्रिस्तान इस्लामी दफन की अनुमति देते हैं. ओइता प्रांत के हिजी में प्रस्तावित कब्रिस्तान सहित नई साइटों को स्थापित करने के प्रयासों को कड़े स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ा है.
जापानियों की तरफ से सार्वजनिक आपत्तियों में शोर और शहरी भीड़भाड़ भी बार-बार आने वाले टॉपिक हैं. कुछ निवासियों ने मस्जिदों से होने वाली ‘अजान’ को अशांति बताया है, जबकि ईद-उल-फितर जैसे त्योहारों के दौरान भीड़ ने यातायात की चिंताएं बढ़ा दी हैं. फुजीसावा में, प्रस्तावित मस्जिद के बड़े आकार को लेकर स्थानीय लोगों का तर्क है कि यह क्षेत्र के पारंपरिक स्वरूप को बदलकर रख देगा.
फुजीसावा के हालिया विवाद को लेकर ग्लोबल लेवल पर प्रतिक्रियाएं आई हैं. सोशल मीडिया पर एक वर्ग जापान के अपनी संस्कृति बचाने के कदम की सराहना कर रहा है, तो दूसरा वर्ग इसे असहिष्णुता बता रहा है. जापान में हाल के सालों में सख्त इमिग्रेशन कंट्रोल की वकालत करने वाले राजनीतिक दलों की दृश्यता बढ़ी है. ‘सानसेतो’ और ‘इशिन नो काई’ जैसे समूहों ने ‘जापान फर्स्ट’ दृष्टिकोण पर जोर दिया है. (फोटो- अरब देशों के मुद्दों पर जापान में प्रदर्शन)
सनाए ताकाइची के प्रशासन ने राष्ट्रीय लचीलेपन और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषयों पर जोर दिया है. कानूनी रूप से, जापान के संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता संरक्षित है, और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार मस्जिद निर्माण नियमों के अनुरूप हैं, जिस वजह से इन्हें रोकना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण है.
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April 16, 2026, 13:06 IST



