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मोबाइल-गेमिंग और YouTube के जाल में फंस रहे बच्चे, मेरठ की घटना को लेकर मनोवैज्ञानिक ने दी चेतावनी

Last Updated:August 30, 2026, 15:02 IST

Meerut News: युवाओं में गेमिंग के प्रति तेजी से बढ़ता आकर्षण उन्हें मानसिक तौर पर बीमार कर रहा है. मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर तरुण पाल ने बताया कि अभिभावक बच्चों में बढ़ती मनोवैज्ञानिक समस्याओं को लेकर आ रहे हैं, जिसमें मोबाइल की लत एक बड़ी चुनौती है.

मेरठ: वर्तमान समय में देखने को मिल रहा है कि युवा गेमिंग की दुनिया में इस तरह से खोते हुए जा रहे हैं कि वह अपने वास्तविक जीवन को ही भूल जाते हैं. कई बार तो वह उस गेमिंग के चक्कर में ही अपना परिवार को छोड़कर भी इधर-उधर भटकने लगते हैं, जिसका नजारा कुछ दिन पहले मेरठ से किलोमीटर दूर हस्तिनापुर में देखने को मिला था. यहां युवा यूट्यूब पर घर का कंटेंट देखते हुए तीन बच्चे अपने घर को छोड़कर ही फरार हो गए थे, जिसको लेकर शिकायत की गई और पुलिस द्वारा जांच पड़ताल की गई. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए लोकल-18 की टीम की ओर से मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर तरुण पाल से खास बातचीत की गई.

तेजी से बढ़ रही है घटनाएंलोकल 18 की टीम से खास बातचीत करते हुए मेडिकल कॉलेज मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर तरुण पाल ने बताया कि वर्तमान समय में मनोवैज्ञानिक समस्याओं को लेकर अभिभावक बच्चों का मोबाइल के प्रति अपना आकर्षण बढ़ गया है. उन्हें छुड़ाना अभिभावकों के लिए काफी चुनौती पूर्ण हो गया है, इसलिए बड़ी संख्या में वह इलाज कराने के लिए आ रहे हैं.

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में स्कूल, कॉलेज सभी जगह मोबाइल पर काम ज्यादा बढ़ गया है. ऐसे में कई बार इसी बात का फायदा उठाकर युवा गेमिंग और अन्य प्रकार के यूट्यूब पर कंटेंट देखते हैं, जिसका प्रभाव उनके मस्तिष्क पर अधिक देखने को मिलता है. वह फिर उसी दुनिया में जीने लगते हैं.

यह भी है एक प्रमुख कारणउन्होंने बताया कि वर्तमान समय में एकल परिवार की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. माता-पिता दोनों ही जॉब करने लगे है, इसलिए बच्चों को मोबाइल उपलब्ध करा देते हैं. जो कहीं ना कहीं बच्चों के भविष्य के लिए काफी घातक होता है. ऐसे में अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. वह बच्चों के साथ समय बिताएंगे तो निश्चित तौर पर इस परेशानी से निकल सकते हैं. उन्होंने बताया कि इसमें दवाइयों से ज्यादा मनोवैज्ञानिक तौर पर जो हम कार्य करते हैं, उसका प्रभाव अधिक पड़ता है. इसलिए बच्चों का जो मोबाइल स्क्रीन टाइम है, उसमें लगातार कमी दर्ज कराएं.

इस तरह के हैं सिम्टम्सबताते चलें की अगर आपका बच्चा भी लगातार मोबाइल देख रहा है और अगर मना करते हैं तो वह चिड़चिड़ापन में कई बार गुस्सा करने लगता है. इसके बाद वह खान-पान पर ध्यान नहीं देता है. ऐसे सभी अभिभावक मनोवैज्ञानिक से सलाह अवश्य लें, ताकि आपका बच्चा कोई गलत कदम ना उठाए और आपको पछताना ना पड़े.

About the Authorआर्यन सेठ

आर्यन सेठ, Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

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Meerut,Uttar Pradesh

First Published :

August 30, 2026, 15:02 IST

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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