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India First Actor To Work in Hollywood | हॉलीवुड में काम करने वाला पहला भारतीय कौन? जिसने 90 साल पहले मचाया गरदा, जानिए किस फिल्म से किया था डेब्यू

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हॉलीवुड में काम करने वाला पहला भारतीय कौन? जिसने 90 साल पहले मचाया गरदा, जानिए

Last Updated:April 20, 2026, 10:11 IST

क्या आप जानते हैं कि सात समंदर पार हॉलीवुड फिल्मों में काम करने वाला पहला भारतीय कौन था? शायद ही किसी को पता होगा. उस एक्टर ने 90 साल पहले विदेशी सरजमीं पर गरदा मचा दिया था. बाद में वो अमेरिकी एयरफोर्स में भी शामिल हुआ. जानिए उस हीरो की कहानी…हॉलीवुड में काम करने वाला पहला भारतीय कौन? जिसने 90 साल पहले मचाया गरदा, जानिएZoom

आज जब हम प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण या देव पटेल जैसे सितारों को हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों में देखते हैं, तो हमें गर्व महसूस होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रास्ते पर सबसे पहला कदम आज से करीब 90 साल पहले एक ऐसे भारतीय ने रखा था, जिसने कभी स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी थी? India First सीरीज के तहत आज हम आपको उस पहले भारतीय शख्स के बारे में बताएंगे, जिसने हॉलीवुड फिल्मों में काम किया. मैसूर के अस्तबलों से निकलकर लॉस एंजिल्स की चकाचौंध तक पहुंचने वाले इस कलाकार का नाम सबु दस्तगीर था. जब भारत अंग्रेजों की गुलामी सह रहा था, तब सबु ने अमेरिका और यूरोप के सिनेमाघरों में अपनी अदाकारी का परचम लहराया था. उनकी कहानी किसी परीकथा से कम नहीं है, जिसमें एक गरीब महावत का बेटा रातों-रात दुनिया का सबसे महंगा और चहेता स्टार बन गया.

सबु का जन्म 27 जनवरी 1924 को मैसूर (अब कर्नाटक) में हुआ था. उनके पिता मैसूर के महाराजा के शाही अस्तबल में महावत थे. बचपन से ही हाथियों के बीच पले-बढ़े सबु को जानवरों की भाषा और उनकी आदतों की गहरी समझ थी. लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था. 1930 के दशक के मध्य में मशहूर डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता रॉबर्ट फ्लेहर्टी और उनकी टीम भारत आई थी. वे रुडयार्ड किपलिंग की कहानी ‘टूमाई ऑफ द एलिफेंट्स’ पर आधारित फिल्म एलिफेंट बॉय (1937) के लिए एक ऐसे लड़के की तलाश कर रहे थे, जो न केवल भारतीय दिखता हो, बल्कि हाथियों के साथ पूरी तरह सहज भी हो. जब उन्होंने 13 साल के सबु को हाथियों के साथ खेलते और उन्हें नियंत्रित करते देखा, तो उनकी तलाश वहीं खत्म हो गई.

सबु दस्तगीर ने पहले एलिफेंट बॉय में फिर जंगल बुक में काम कर दुनिया में धमाल मचा दिया.

मैसूर से लंदन और फिर हॉलीवुड का सफरफिल्म एलिफेंट बॉय की शूटिंग मैसूर और लंदन के स्टूडियो में हुई. जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो सबु की मासूमियत और उनकी नैसर्गिक अदाकारी ने पश्चिमी दर्शकों का दिल जीत लिया. इसके बाद फिल्म के निर्माता अलेक्जेंडर कोर्डा उन्हें लंदन ले गए, जहां उन्होंने सबु को कई बड़ी फिल्मों के लिए साइन किया. 1940 में आई द थीफ ऑफ बगदाद सबु के करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक साबित हुई. इस फिल्म में उन्होंने अबू का किरदार निभाया था, जो आज भी फैंटेसी सिनेमा के प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय है. 1940 के दशक की शुरुआत में सबु हॉलीवुड चले गए और वहां उन्होंने अरेबियन नाइट्स (1942) और व्हाइट सैवेज जैसी सफल फिल्मों में काम किया. लेकिन उनकी सबसे यादगार भूमिका 1942 की फिल्म जंगल बुक में मोगली की रही. हालांकि, मोगली का किरदार कई अभिनेताओं ने निभाया है, लेकिन सबु द्वारा निभाया गया वह ओरिजिनल वर्जन आज भी फिल्म समीक्षकों की पहली पसंद माना जाता है. सबु उस दौर में हॉलीवुड के पोस्टर बॉय बन चुके थे और उनकी तस्वीरें अमेरिकी पत्रिकाओं के कवर पेज पर छपती थीं.

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सबु यूएस एयर फोर्स में शामिल हो गए थे.

दूसरे विश्वयुद्ध में अमेरिकी वायुसेना से जुड़ गए सबु!सबु केवल परदे के हीरो नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में भी वे काफी बहादुर थे. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ, तो सबु ने स्वेच्छा से अमेरिकी वायु सेना में शामिल होने का फैसला किया. उन्होंने टेलर गनर के रूप में 40 से अधिक हवाई मिशनों में हिस्सा लिया. उनकी बहादुरी के लिए उन्हें अमेरिकी सरकार द्वारा ‘डिस्टिंग्विश्ड फ्लाइंग क्रॉस’ जैसे प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान से नवाजा गया था. युद्ध खत्म होने के बाद वे वापस फिल्मों की दुनिया में लौटे, लेकिन तब तक हॉलीवुड का मिजाज थोड़ा बदल चुका था. सबु ने 1948 में अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली थी. उन्होंने मैरीलिन कूपर नाम की एक अभिनेत्री से शादी की और उनके दो बच्चे हुए. सबु की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1960 में हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम में उनके नाम का सितारा लगाया गया. वे पहले ऐसे भारतीय मूल के कलाकार थे, जिन्हें यह सम्मान मिला.

एक महान करियर का दुखद अंतसबु की सफलता की कहानी जितनी प्रेरणादायक थी, उनका अंत उतना ही अचानक और दुखद रहा. 2 दिसंबर 1963 को महज 39 साल की उम्र में सबु का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. उनकी मौत से हॉलीवुड और भारत दोनों ही जगहों पर उनके प्रशंसकों को गहरा सदमा लगा. उन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में वह सब कुछ हासिल कर लिया था, जो किसी भी अभिनेता के लिए एक सपना होता है. सबु दस्तगीर को आज भी उस शख्स के रूप में याद किया जाता है, जिसने दुनिया को यह बताया कि एक भारतीय कलाकार में भी पूरी दुनिया में नाम कमाने की क्षमता है, जो अन्य किसी भी अमेरिकी या यूरोपीय सितारे में होती है. मैसूर के जंगलों से शुरू हुआ उनका सफर आज भी उन तमाम कलाकारों के लिए एक मिसाल है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं. सबु ने उस दौर में भारत का नाम रौशन किया, जब देश को अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा था.

About the AuthorNiranjan Dubey

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर के तौर कार्यरत. इंटरनेशनल, वेब स्टोरी, ऑफबीट, रिजनल सिनेमा के इंचार्ज. डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय. नेटवर्क 18 के अलावा टाइम्स ग्रुप, …और पढ़ें

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First Published :

April 20, 2026, 10:11 IST

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