‘देश के लिए खतरा हैं खालिस्तानी’, कनाडा सरकार के लिए भी सिर दर्द बने भारत के दुश्मन, कैसे नाक में किया दम?

भारत विरोधियों गतिविधियों में शामिल खालिस्तानी अब कनाडा के लिए भी परेशानी का सबब बन रहे हैं. कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने इसे लेकर चेतावनी दी है. एजेंसी ने कहा कि कुछ व्यक्ति हिंसक गतिविधियों में शामिल हैं. वे चरमपंथ से जुड़े ऑपरेशनों का समर्थन करने के लिए कनाडा को बेस के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.
खालिस्तानी आतंकवादियों की एक छोटी संख्या कनाडा और विदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई है. साल 2025 की सार्वजनिक रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी किया गया है, जिसमें खालिस्तानियों को लेकर चेतावनी जारी कर रही है.
‘कनाडा के रुख में बदलाव’
कनाडा की इस रिपोर्ट पर पूर्व भारतीय राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि यह रिपोर्ट कनाडा के दृष्टिकोण में एक अहम बदलाव है. उन्होंने कहा कि सालों से कनाडा में कुछ राजनीतिक तत्वों ने खालिस्तान समर्थक संगठनों को प्रभाव बढ़ाने और खुलकर विस्तार काम करने की अनुमति दी थी. त्रिगुणायत ने ‘फर्स्टपोस्ट’ को बताया, “यह सुखद बात है. कनाडा सरकार और उनकी एजेंसियों ने न केवल उनकी मौजूदगी और उनसे होने वाले खतरों को माना है, बल्कि इस पर सार्वजनिक बयान भी दिया है”.
इस रिपोर्ट में कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथियों की गतिविधियों के बारे में चर्चा की गई है. ये रिपोर्ट उनसे होने वाले खतरों की ओर इशारा करती है. साथ ही इस बात पर भी जोर देती है कि इसमें केवल सीमित संख्या में लोग शामिल हैं.
एजेंसी ने दावा किया कि इनमें से कुछ व्यक्ति कनाडा के समाज में अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं. वे अपने एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए संस्थानों का उपयोग करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वे समुदाय के सदस्यों से धन जुटा सकते हैं. कभी-कभी उनकी जानकारी के बिना और उस धन को हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ सकते हैं.
राजनीतिक और चरमपंथ के बीच अंतर
रिपोर्ट हिंसक चरमपंथ और राजनीतिक सक्रियता के बीच साफ अंतर करती है. इसमें कहा गया है कि शांतिपूर्ण माध्यमों से एक अलग खालिस्तान देश के बनाने का समर्थन करता है. लेकिन कनाडा में चरमपंथी गतिविधि के लिए कोई जगह नहीं है.
इसी रिपोर्ट में चेतावनी दी कि कुछ व्यक्ति हिंसा को बढ़ावा देने के लिए धन जुटाते हैं. इसका कई स्थानों पर फायदा उठाते हैं. अधिकारियों ने कहा कि इससे सतर्क रहना अहम हो जाता है. साथ ही कानूनी राजनीतिक अभिव्यक्ति का सम्मान भी करना चाहिए.
भारत और कनाडा के बीच बढ़ता सहयोग
इन चिंताओं के बावजूद, दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग सुधारने के लिए कदम उठाए हैं. भारत और कनाडा संचार और सूचना साझाकरण में सुधार को लेकर कदम उठाए हैं. इसके लिए एक-दूसरे की राजधानियों में सुरक्षा और कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करने पर सहमति बनी है.
CSIS ने कहा कि कनाडा को चरमपंथी खतरों और विदेशी हस्तक्षेप दोनों से निपटने में सतर्क रहना चाहिए, जबकि कानूनी राजनीतिक गतिविधियों की रक्षा करना जारी रखना चाहिए.



