क्रांति गौड़ को परिवार की कुर्बानी याद है, टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर देना चाहती है माता-पिता को रिटर्न गिफ्ट

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क्रांति टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर देना चाहती है माता-पिता को रिटर्न गिफ्ट
Last Updated:June 23, 2026, 13:25 IST
क्रांति गौड़ ने कहा, कि अगर परिवार साथ है तो बाकी लोगों की बातों का कोई मतलब नहीं, क्योंकि वे वैसे भी साथ नहीं हैं. मैं अपने परिवार की बहुत आभारी हूं, उन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया, जबकि हमेशा पैसों की कमी रहती थी.अब गौड़ भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन करके अपने परिवार को गर्व महसूस कराना चाहती हैं. तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ अपने मूल और अपने माता-पिता की कुर्बानियां नहीं भूली हैं.
नई दिल्ली. भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नियमित सदस्य बनने के बावजूद, तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ अपने गांव और माता-पिता की मेहनत को नहीं भूली हैं. क्रांति इंग्लैंड में चल रहे T20 वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन करके अपने परिवार का भरोसा लौटाना चाहती हैं. मध्य प्रदेश के छोटे गांव से आने वाली गौड़ ने बताया कि उनकी मां ने क्रिकेट किट खरीदने के लिए अपने गहने बेच दिए थे.
क्रांति गौड़ ने कहा, कि अगर परिवार साथ है तो बाकी लोगों की बातों का कोई मतलब नहीं, क्योंकि वे वैसे भी साथ नहीं हैं. मैं अपने परिवार की बहुत आभारी हूं, उन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया, जबकि हमेशा पैसों की कमी रहती थी.अब गौड़ भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन करके अपने परिवार को गर्व महसूस कराना चाहती हैं.
क्रिकेट के लिए परिवार ने दी कुर्बानी
मेरी मां ने मेरे लिए क्रिकेट किट खरीदने के लिए अपने गहने बेचे. यह बहुत बड़ी कुर्बानी थी. परिवार मेरे लिए इतना कर रहा था, तो मुझे जिम्मेदारी महसूस हुई. मैं उन्हें कुछ लौटाना चाहती थी. मैं उनकी कुर्बानी को मायने देना चाहती थी.’ गौड़ ने कहा कि वह अपने परिवार की हमेशा ऋणी रहेंगी, जिन्होंने उन्हें अपनी पसंद का करियर चुनने की आजादी दी. ‘उस समय कई लड़कियों को बाहर निकलने की भी इजाजत नहीं थी, लेकिन मेरे माता-पिता अलग थे. उन्होंने कभी नहीं महसूस कराया कि मैं कुछ गलत कर रही हूं. उन्होंने मेरे सपने पर भरोसा किया.’ उन्होंने कहा, ‘इससे मुझे आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य को पाने की ताकत मिली. जब पता होता है कि परिवार साथ है, तो बाहर की दुनिया को नजरअंदाज करना आसान हो जाता है.’ गौड़ के भारतीय क्रिकेट में आने से उनके गांव में भी बदलाव आया, वहां क्रिकेट अकादमी खुली और अब माता-पिता लड़कियों को खेल में करियर बनाने की इजाजत दे रहे हैं.
वर्ल्ड कप की जीत ने बदला सोच
भारत के लिए ODI वर्ल्ड कप (2025) में मेरे प्रदर्शन की वजह से घुवारा गांव में क्रिकेट अकादमी खुल गई है, जहां मैं रहती हूं. अब वहां कई लड़कियां क्रिकेट खेलने आ रही हैं. यह मेरे लिए गर्व की बात है.’ ‘उनके माता-पिता अब अपनी बेटियों पर भरोसा कर रहे हैं और मान रहे हैं कि वे इस खेल में करियर बना सकती हैं. मैं इन लड़कियों से नियमित मिलती हूं. वर्ल्ड कप जीत ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है.’ अब गौड़ मैनचेस्टर में वर्ल्ड कप के अहम मैच में बांग्लादेश को चुनौती देने के लिए तैयार हैं. भारत को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए यह मैच जीतना जरूरी है. ‘मैं हमेशा सोचती हूं कि मुझे अपना 100 प्रतिशत देना है. जो भी गेंद डालूं, उसमें अपना बेस्ट दूं. हम नई गेंदों पर काम करते हैं, लेकिन अपनी ताकत पर ज्यादा ध्यान देते हैं, वही गेंदें जो हमें विकेट दिलाती हैं.’
About the AuthorRajeev MishraAssociate editor
मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें
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