Rajasthan

रेगिस्तान के तेल कुओं में क्रांति, अब इंसान नहीं ‘AI का दिमाग’ संभालेगा पूरा सिस्टम, बाड़मेर में बदल रही तस्वीर

Last Updated:May 11, 2026, 20:54 IST

National Technology Day: बाड़मेर के तेल क्षेत्रों में एआई और डिजिटल तकनीक ने उद्योग का स्वरूप बदल दिया है. अब मशीनों के साथ-साथ एआई सिस्टम भी कामकाज का अहम हिस्सा बन गए हैं, जो उत्पादन और सुरक्षा दोनों में मदद कर रहे हैं. पहले जहां तकनीकी जानकारी निकालने में घंटों लगते थे, अब वह कुछ सेकंड में उपलब्ध हो जाती है. RFID तकनीक से इन्वेंटरी मैनेजमेंट तेज हुआ है और ऊर्जा की बचत भी हो रही है. डिजिटल ट्विन तकनीक से मशीनों की निगरानी रियल टाइम में हो रही है, जिससे खराबी से पहले ही अलर्ट मिल जाता है.

ख़बरें फटाफट

रेगिस्तान में हाईटेक क्रांति, AI से स्मार्ट बन रहा बाड़मेर का तेल और गैस सेक्टZoom

बाड़मेर. कभी भारी मशीनों, मैनुअल निगरानी और पारंपरिक तकनीकों के भरोसे चलने वाला तेल और गैस उद्योग अब तेजी से बदल रहा है. रेगिस्तान की धरती पर बसे बाड़मेर के तेल क्षेत्रों में अब केवल मशीनें ही काम नहीं कर रहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी एक डिजिटल दिमाग की तरह काम करने लगा है. बाड़मेर देश के महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां संचालित तेल और गैस परियोजनाओं में अब आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है.

पहले यह पूरा उद्योग भारी मशीनरी, इंजीनियरिंग अनुभव और मैनुअल मॉनिटरिंग पर निर्भर था, लेकिन अब एआई आधारित सिस्टम रियल टाइम डेटा का विश्लेषण कर फैसले लेने में मदद कर रहे हैं. इससे उत्पादन की दक्षता बढ़ रही है और जोखिम भी कम हो रहा है. आने वाले समय में तेल उद्योग में इंसानों की भूमिका खत्म नहीं होगी, लेकिन उनका काम ज्यादा तकनीकी और निर्णय आधारित होता जाएगा.

अब घंटों में नहीं मिनटों में हो रहा काम, ऐसे बदल रही तस्वीर

ऊर्जा क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म और जेनरेटिव एआई के उपयोग से तकनीकी दस्तावेजों को समझना बेहद आसान हो गया है. वेल कंप्लीशन रिपोर्ट, फील्ड डेवलपमेंट प्लान और खरीद प्रक्रिया से जुड़े बड़े दस्तावेजों से जरूरी जानकारी अब कुछ ही सेकंड में हासिल की जा रही है. पहले इंजीनियरों और कर्मचारियों को हजारों पन्नों के तकनीकी रिकॉर्ड खंगालने पड़ते थे लेकिन अब AI आधारित प्लेटफॉर्म यह काम बेहद कम समय में कर रहे हैं.

आई केयर्न कर्मचारियों के बना महत्वपूर्ण टूल

देश के प्रमुख निजी तेल एवं गैस उत्पादकों में शामिल वेदांता ऑयल एंड गैस केयर्न अपने पूरे संचालन में डिजिटल तकनीक को गहराई से लागू कर रहा है. कंपनी का उद्देश्य लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और कामकाज को अधिक तेज और प्रभावी बनाना है. कंपनी का इन-हाउस प्लेटफॉर्म आई केयर्न (ICAIRN) अब कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण टूल बन गया है. इसकी मदद से वेल कंप्लीशन रिपोर्ट, फील्ड डेवलपमेंट प्लान और प्रोक्योरमेंट कॉन्टेक्टस जैसे बड़े तकनीकी दस्तावेजों से कुछ ही सेकंड में जरूरी जानकारी प्राप्त हो रही है.

RFID तकनीक से ऊर्जा की हो रही बचत

कंपनी ने अपना पहला एजेंटिक एआई सिस्टम “केयर्न आईटी बड़ी” शुरू किया है. यह पारंपरिक चैटबॉट से अलग है, क्योंकि यह केवल सवालों के जवाब नहीं देता है बल्कि समस्या को समझकर समाधान सुझाता है और आईटी सर्विस रिक्वेस्ट को आगे बढ़ाने में भी मदद करता है. रेडियो फ्रीक्केंसी पहचान (RFID) तकनीक के इस्तेमाल से इन्वेंटरी टेकिंग अब कुछ दिनों में पूरी हो रही है जबकि पहले इसमें महीनों लगते थे. इस तकनीक से 15-20 फीसदी तक ऊर्जा की बचत हुई है जबकि लगभग 134 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है.

मशीन खराब होने से पहले ही मिलेगा अलर्ट

तेल और गैस उद्योग में डिजिटल ट्विन तकनीक भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है.  यह तकनीक मशीनों और फील्ड ऑपरेशंस की रियल-टाइम डिजिटल कॉपी तैयार करती है जिससे उपकरणों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मशीन खराब होने से पहले ही संभावित खतरे का संकेत दे देती है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Location :

Barmer,Rajasthan

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj