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बॉलीवुड की वो मायूस मल्लिका, जिसके पति ने ही नर्क से बद्दतर बना दी थी जिंदगी, जाते-जाते भी मेकर्स को कर गईं मालामाल

Last Updated:April 29, 2026, 14:13 IST

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम सिर्फ स्टार नहीं बनते, बल्कि एक एहसास बन जाते हैं. मीना कुमारी ऐसा ही एक नाम हैं. एक ऐसी अदाकारा, जिनकी आंखों का दर्द, आवाज की कंपन पर्दे पर हर किरदार को जीवित कर देता था. पर्दे पर किरदार के हर दर्द को महसूस करने वाली मीना कुमारी ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उनकी जिंदगी भी दर्द में डूब जाएगी.

नई दिल्ली. मीना कुमारी और दर्द का रिश्ता कुछ ऐसा रहा जिसे न शब्दों में पिरोया जा सकता है और न ही तोड़ा जा सकता था. ताउम्र उन्हें दर्द और तकलीफ ही मिली, बस तकलीफ का रूप बदलता गया. 1 अगस्त 1933 को महजबीन बानो के रूप में जन्मीं मीना कुमारी की जिंदगी शुरुआत से ही संघर्षों में घिरी रही. मीना कुमारी के परिवार की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि एक्ट्रेस के जन्म लेते ही उनके पिता उन्हें अनाथालय छोड़ आए थे. आखिरकार जब उनका दिल पिघला तो वो अपनी बेटी को वापस ले आए, लेकिन संघर्ष खत्म नहीं हुआ.

परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए मीना कुमारी ने छोटी सी उम्र से काम करना शुरू कर दिया था. नौ साल की उम्र में महजबीन ने परिवार का सहारा बनने के लिए फिल्मों में कदम रखा. बाल कलाकार के तौर पर शुरू हुए इस सफर ने जल्द ही उन्हें स्टारडम के शिखर पर पहुंचा दिया.

‘बैजू बावरा’, ‘परिणीता’, ‘साहिब बीबी और गुलाम’, ‘काजल’ और ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें अभिनय की उस ऊंचाई पर पहुंचाया, जहां दर्द उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया. उनकी आवाज में ठहराव था, आंखों में अधूरी दास्तानें और चेहरे पर ऐसी मासूम उदासी, जिसने दर्शकों को बांध लिया. दर्शक उनकी आंखों की ओर खुद-ब-खुद खींचे चले आते थे.

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पर्दे की चमक के पीछे उनकी निजी जिंदगी तकलीफों से भरी थी. महज 18 साल की उम्र में वो अपनी दोगुनी उम्र के शादीशुदा फिल्ममेकर से दिल लगा बैठी थीं. उन्हें मशहूर फिल्मकार कमाल अमरोही से प्यार हो गया था जो बाद में जाकर उनकी बर्बादी की वजह बना. कमाल अमरोही पहले से शादीशुदा और तीन बच्चों के पिता थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मीना कुमारी से छिपकर दूसरा निकाह कर लिया था. इस निकाह को दोनों ने महीनों तक दुनिया की नजर से छिपाकर रखा, लेकिन जैसे ही रिश्ता जग जाहिर हुआ, दरार पड़नी शुरू हो गई.

कमाल अमरोही ने खुद शादीशुदा और तीन बच्चों के पिता होते हुए मीना कुमारी से दूसरा निकाह किया, लेकिन एक्ट्रेस पर दुनियाभर की पाबंदियां लगा दीं. किससे मिलना है, कब लौटना है, क्या करना है, सेट पर किससे बात करनी है, मीना के लिए ये सब फैसले कमाल अमरोही लेंने लगे थे. एक ऐसी अभिनेत्री, जिसके नाम पर फिल्में बिकती थीं, वह अपनी ही जिंदगी में कैद महसूस करने लगीं.

रिश्तों की दरारों और अकेलेपन ने उन्हें शराब की ओर धकेल दिया. डॉक्टर की सलाह पर शुरू हुई ब्रांडी धीरे-धीरे सहारा बन गई, फिर आदत और आखिरकार विनाश. लिवर सिरोसिस उनकी मौत की वजह बनी. लाख मुश्किलों के बावजूद वह हर सुबह कैमरे के सामने वही गहराई लेकर खड़ी होती रहीं, जिसने उन्हें महान बनाया.

‘पाकीज़ा’ उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और सबसे दर्दनाक अध्याय साबित हुई. यह फिल्म लगभग 14 वर्षों तक अधूरी रही, क्योंकि मीना और कमाल अमरोही का रिश्ता टूट चुका था. जब फिल्म दोबारा शुरू हुई, तब तक मीना गंभीर रूप से बीमार थीं. सूजा हुआ चेहरा, कमजोर शरीर और बिगड़ती सेहत के बावजूद उन्होंने फिल्म पूरी की. प्रीमियर के दौरान जब उन्होंने खुद को स्क्रीन पर देखा, तो उनकी आंखें भर आईं, मानो वह जानती थीं कि यह सिर्फ फिल्म नहीं, उनकी विदाई है.

‘पाकीजा’ मीना कुमारी की आखिरी फिल्म साबित हुई. फिल्म की रिलीज के कुछ दिन बाद ही मीना कुमारी का देहांत हो गया जिसने फिल्म को सुपरहिट बना दिया. हर कोई बॉलीवुड को मायूस मीना को आखिरी बार पर्दे पर देखने के लिए थिएटर्स तक खींचा चला आया और जाते-जाते भी वो मेकर कमाल अमरोही को मालामाल कर गईं.

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April 29, 2026, 14:13 IST

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