एशिया में बदलेगा शक्ति संतुलन? ड्रैगन के खिलाफ समुराई की तैयारी, चीन की दबंगई के खिलाफ जापान का बड़ा दांव

Last Updated:May 03, 2026, 22:28 IST
जापान के 1947 वाले संविधान में बदलाव का रास्ता सरेआम साफ हो रहा है. जापान के आर्टिकल 9 में युद्ध को देश के अधिकार के रूप में त्यागा गया था. अब साने ताकाइची अपनी मिलिट्री ताकत को बहुत ज्यादा बढ़ाने वाली हैं. सत्ताधारी पार्टी संसद में इस भारी चर्चा को सरेआम बहुत आगे बढ़ाएगी. पीएम ताकाइची ने कहा कि संविधान समय की जरूरतों के अनुसार अपडेट होना चाहिए.
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साने ताकाइची की अगुवाई में जापान अब आक्रामक रुख अपना रहा है.
टोक्यो. जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संविधान संशोधन के संकेत देकर एशिया की राजनीति में हलचल तेज कर दी है. यह कदम सिर्फ घरेलू सुधार नहीं, बल्कि सीधे तौर पर चीन की बढ़ती आक्रामकता के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. ताकाइची का इशारा साफ है कि जापान अब अपनी सैन्य सीमाओं को ढीला करने और आत्मरक्षा बलों को ज्यादा ताकत देने की दिशा में बढ़ सकता है. खासकर ऐसे समय में जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की सैन्य गतिविधियां और विस्तारवादी रवैया लगातार चिंता बढ़ा रहा है.
साने ताकाइची एक बार फिर देश के 1947 के संविधान में संशोधन कर सकती हैं. क्योडो न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, संविधान दिवस (3 मई) के मौके पर संशोधन समर्थकों की एक बैठक के लिए भेजे गए वीडियो संदेश में ताकाइची ने इस ओर इशारा किया है.
उन्होंने कहा कि सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी डाइट (संसद) में चर्चा को आगे बढ़ाएगी, ताकि अन्य दलों के सहयोग के साथ मिलकर फैसले लिए जा सकें. उन्होंने यह भी वादा किया कि प्रस्तावित संशोधनों को जनता को ध्यान से समझाया जाएगा. जापान का मौजूदा संविधान 1947 में लागू हुआ था. इसे अक्सर शांतिवादी संविधान कहा जाता है, क्योंकि इसके अनुच्छेद-9 में युद्ध को देश के अधिकार के रूप में त्याग दिया गया है और जापान को ‘युद्ध करने की क्षमता’ रखने से रोका गया है.
ताकाइची ने कहा कि इसे समय की जरूरतों के अनुसार समय-समय पर अपडेट किया जाना चाहिए जो देश की नींव का काम करता है. ताकाइची पहली बार इस तरह के बदलावों को आगे बढ़ा रही हैं, जबकि यह संविधान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लागू हुआ था. उन्होंने कहा कि चर्चा सिर्फ चर्चा के लिए नहीं होनी चाहिए. लोगों के भरोसे को पूरा करने के लिए नेताओं को फैसले लेने के मकसद से चर्चा करनी चाहिए.
संविधान में बदलाव के संकेतों को पहले भी विरोध का सामना करना पड़ा है. फरवरी में टोक्यो में लोगों ने प्रधानमंत्री के संविधान संशोधन के प्रयास के खिलाफ प्रदर्शन किया था. सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने ‘संविधान संशोधन नहीं चाहिए’ और ‘शांति की रक्षा करो’ जैसे नारे लगाए और अपनी असहमति जताई थी.
पिछले महीने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के सम्मेलन में ताकाइची ने कहा था कि हम चाहते हैं कि अगले साल के सम्मेलन तक संविधान संशोधन का एक प्रस्ताव सामने हो और अब समय आ गया है कि संविधान में सुधार किया जाए. अक्टूबर 2025 में जापान की प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची, इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं. उन्हें फरवरी 2026 में फिर से चुना गया.
About the AuthorRakesh Ranjan Kumar
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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